प्रिंट रेट से भी महंगे दामों में बेचा जा रहा पान मसाला और सिगरेट

Belal Jani
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ऐसे जमाखोरों और मुनाफाखोरों के उपर कब होगी कार्यवाही, जो सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं 



जौनपुर। जनपद में लगभग 15 दिनों से गुटखा, पान मसाला और सिगरेट की बिक्री अब 'प्रिंट रेट' नहीं, बल्कि 'मनमर्जी के रेट' पर की जा रही है। 140 रुपए अंकित मूल्य वाला गुटखा पान मसाला पैकेट 200 से 220 रुपए तक में और इसी प्रकार विभिन्न नामों के सिगरेटो को भी बेचें जाने की शिकायतें इन दिनों आम लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन कोई भी सम्बंधित इस तरफ ध्यान देना उचित नहीं समझ रहा है।सवाल यह उठता है कि आखिर यह खुली लूट किसके संरक्षण में चल रही है ? जिम्मेदार अधिकारी भी गुटखा पान मसाला और सिगरेटो के महंगे दामों पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। और यह काम जनपद ही नहीं अगल-बगल के जनपदों के कोने कोने में भी गुटखा पान मसाला सिगरेटो की जमाखोरी एवं मुनाफाखोरी कर अधिक दामों में बेचा जा रहा है। जिसके चलते अचानक हुई बढ़ोतरी को लेकर लोगों में भारीआक्रोश देखने को मिल रहा है। इन दिनों उपभोक्ताओं का आरोप है कि बड़े व्यापारी भारी मात्रा में स्टॉक उठाकर बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बना रहे हैं और फिर ऊंचे दामों पर माल खपा रहे हैं मार्केट में। छोटे दुकानदार भी मजबूरी बताकर उपभोक्ताओं को यह कहकर कि प्रिंट रेट से अधिक दामों पर मिला है। इस लिए मजबूरी में वर्तमान समय में बड़ा कर रेट पर फुटकर में बिक्री कर रहें हैं।यह भी बात सामने आ रही है कि बड़े व्यापारियों द्वारा यह बताया जा रहा है कि बाजार में जीएसटी बढ़ने और कर वृद्धि के चलते मार्केट में उछाल आई है।परंतु आधिकारिक पुष्टि कहीं नजर नहीं आती। अगर कर नहीं बढ़ा, तो दाम क्यों बढ़े और अगर बढ़ा है तो आदेश कहां है ? सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक चुप्पी पर हैं। जब प्रिंट रेट से अधिक वसूली उपभोक्ता संरक्षण नियमों का उल्लंघन मानी जाती है, तो कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है? क्या निरीक्षण केवल कागजों में हो रहे हैं? जनपद ही नहीं, आसपास के जिलो में भी इसी तरह का हाल है।