जौनपुर वासी ने फिर किया मिसाली काम,गंगा-जमुनी तहज़ीब की हो रही चर्चा

Belal Jani
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जौनपुर।खेतासराय थाना क्षेत्र के बुढ़कुरहा गांव के पास एम्बुलेंस और बोलेरो वाहन की टक्कर में मां के शव को लेकर घर जा रहे दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें जिला अस्पताल पहुंचा कर भर्ती कराया गया। जैसे ही इस दर्दनाक घटना की जानकारी जिले के बक्शा थाना क्षेत्र के दरबानीपुर गांव निवासी मोहम्मद असजद भाई को इस तरह से मिली कि एम्बुलेंस से मां के शव को घर ले कर आ रहे पिता के साथ पुत्र भी गंभीर रूप से घायल हो गए।और उनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है और दोनों घायल पिता पुत्र के पास उनका कोई अपना नहीं है तो वह इस तरह बेचैन हो गये कि जैसा कोई उनका तन्हा हो।अपना सारा काम छोड़कर वह सीधे जिला अस्पताल पहुंच कर दोनों को ढांढस बंधाया और उनके स्वास्थ्य के बारे में सम्पूर्ण जानकारी करने के बाद अस्पताल में रुक कर उनकी देख भाल में जुट गए।जिसको देखकर अस्पताल में हर कोई उनके जज्बे को सलाम पेश कर वही अपनी परम्परागत संस्कृति गंगा-जमुनी तहज़ीब की पुनः याद करने लगे कि हिंदू-मुस्लिम सिख ईसाई भाईचारे की जो मिसाल है आज भी वह मिसाल पूरी तरह कायम है। नफरत फैलाने वाले चाहे जितनी नफरत फैलाते रहे इसका असर हम जनपद वासियों की नजर में पहले भी कोई खास नहीं था ना इसकी अहमियत  आने वाले समय में ही कोई  रहेगी।


बता दें अकबरपुर अम्बेडकर नगर जनपद निवासी राकेश सिंह, पिता शिवमूर्ति सिंह के साथ कोलकाता से अपनी माता जी के पार्थिव शरीर को लेकर घर लौट रहे थे। रास्ते में बुढ़कुरहा मोड़ के पास उनकी गाड़ी की सामने से आ रही स्कॉर्पियो से जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए।

स्थानीय लोगों के सहयोग से दोनों घायलों को तत्काल एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसी बीच जैसे ही इस हादसे की जानकारी मोहम्मद असजद भाई को मिली वह अपना सारा काम छोड़कर अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने करीब 3 से 4 घंटे तक घायलों के साथ रहकर हर संभव मदद करने के साथ ही उनके परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखा।

घायलों के परिजन जब जौनपुर जिला अस्पताल पहुंचे और असजद भाई की अपने वालों की सेवा करते देखा तो उन्होंने भावुक होकर कहा-

"आप तो हमारे लिए इस अजनबी शहर में फरिश्ता बनकर मिले हैं।" अब यहां पर यह कहना ग़लत नहीं होगा है जौनपुर वासियों की असली पहचान इंसानियत धर्म और जाति से ऊपर है। मुसीबत के समय एक-दूसरे का हांथ थामना ही हमारी तहज़ीब और संस्कृति की सबसे बड़ी खुबसूरत पहचान है।