प्रतिबंधित 'दोहरा' बनाने वालों को छोड़,बेचने वाले पर की जा रही कारवाई बनी चर्चा

Belal Jani
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आबकारी और खाद्य विभाग की टीम द्वारा आखिर दोहरा बनाने वाले मौत के सौदागरो पर क्यूं कार्यवाही नहीं की जा रही है।जिसकी चर्चा शहर के विभिन्न स्थानों पर करने वाले देखें जाते हैं?



जौनपुर। शुक्रवार को लाइन बाजार थाना क्षेत्र के नेवादा और खरका मुहल्ला तिराहे पर अवैध तरीके से बेचे जा रहे प्रतिबंधित "दोहरे" के खिलाफ आबकारी विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। जिसके चलते अचानक हुई कार्रवाई से इलाके में हड़कंप कुछ समय के लिए जरूर मच गया। लेकिन इसी प्रकार से जान लेवा दोहरा शहर कोतवाली क्षेत्र के विभिन्न स्थानों गली मुहल्लों में बगैर किसी खौफ के धड़ले से बेचा जा रहा है।अब सोचने वाली बात यह है कि आखिर टीम की नजरें इन स्थानों पर क्यूं नहीं पड़ रही है।

जानकारी के मुताबिक खरका तिराहे पर स्थित शीला देवी की दुकान और नेवादा में कमलेश मौर्या पान भंडार पर विभागीय टीम ने विशेष जांच की। यह कारवाई लगातार अधिकारियों को मिल रही शिकायत पर की गई। शिकायत मिल रही थी कि ऐसी दुकानों समेत आसपास के कई स्थानों पर खुलेआम अवैध दोहरा और तंबाकू  बेचा जा रहे हैं। इसी प्रकार कोतवाली क्षेत्र में भी बगैर किसी भय के जान लेवा दोहरा को बेचा जा रहा है। बता दें समय समय पर इसी प्रकार की खानापूर्ति वाली कार्रवाई करके सम्बंधित टीमें अपनी ही पीठ स्वयं थपथपा लिया करती है।
शहरी लोगों द्वारा की जा रही चर्चाओं की मानी जाए तो टीम के लोगो की जान लेवा दोहरा बनाने वाले मौत के सौदागरो तक नज़रें क्यूं नहीं पहुंच रही है आखिर क्या कारण है।यह अपने आप में टीम पर एक सवालिया निशान है। सूत्रों की माने जाएं तो शहरी क्षेत्र के विभिन्न मुहल्लों में जैसे शकर मंडी,पान दरीबा,खासनपुर, सिपाह, भंडारी आदि में बगैर किसी भय के धड़ल्ले दोहरा बना कर बेचा जाता है। हालांकि समय समय पर एक दो तत्कालीन जिला अधिकारियों ने जान लेवा इस दोहरे को पूरी तरह से जौनपुर को दोहरा मुक्त कराने का बहुत ही प्रयास किया। मुख्य रूप से कई सामाजिक संस्थाओं की मांग पर तत्कालीन जिलाधिकारी रहे दिनेश कुमार सिंह ने अपने कार्यकाल में जान लेवा दोहरा को प्रतिबंधित करने के साथ ही कार्यवाही भी करवाई। कार्रवाई भी इस प्रकार से हुई कि दोहरा बनाने वालों से लेकर बेचने वाले और साथ ही दोहरा को खाने वालो में एक भय क़ायम हो गया। उन्होंने तो दोहरा जो भी खाते दिखाई देता उसको बताने वाले को ससम्मान एक हजार रुपए का इनाम दिया करते थे। उनके रहते हुए किसी हद तक प्रतिबंधित दोहरा पर अंकुश भी लग गया था। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद जान लेवा दोहरा बनाने वाले, बेचने वाले और खाने वालो की पुनः संख्या बढ़ गई है। जिसकी चर्चा आज भी लोग एक दूसरे से शहर गली मुहल्लों और चौराहों पर करते देखे जा सकते हैं।