ईरान -भारत मजबूत रिश्तों की जौनपुर बना मिसाल,शिया कालेज में दिखा गंगा जमुनी संगम

Belal Jani
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इल्म, अदब और रूहानियत की जौनपुर वो सरज़मीं है जहाँ हर दौर में मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत की मिसालें कायम होती रही हैं: डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही


जौनपुर।बुधवार रात्रि नगर के रज़ा डीएम शिया इंटर कालेज व पीजी कॉलेज मैदान में ग़म और एहतेराम से भरी एक मजलिस का आयोजन किया गया,जिसमें ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामनई समेत कई ईरानी कमांडरों व शहीद हुए बच्चों और नेताओं की शहादत को याद किया गया।
मजलिस में भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि
आयतुल्लाह डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने खास तौर पर शिरकत की,जबकि लखनऊ की जामा मस्जिद टीला शाह के इमाम
मौलाना फज़ल ए मन्नान वाइज़ी ने भी मजलिस को खिताब किया
मजलिस के दौरान शहीद सुप्रीम लीडर की ज़िंदगी,उनकी क़ियादत और उनकी शहादत का दर्दनाक तज़किरा किया गया,

बताया गया कि कैसे उन्होंने पूरी ज़िंदगी मज़लूमों की आवाज़ बुलंद की,ज़ुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ डटकर खड़े रहे,और आख़िरकार हक़ और इंसानियत की इसी राह में दुश्मनों के हमले का निशाना बनकर शहादत का मुकाम हासिल किया,

उनकी शहादत ने दुनिया भर के इंसाफ़ पसंद लोगों की आंखों को नम कर दिया,लेकिन साथ ही ये पैग़ाम भी दिया,कि हक़ की राह में दी गई कुर्बानी कभी खत्म नहीं होती
अपने संबोधन में आयतुल्लाह डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने जौनपुर की तारीखी अहमियत बयान करते हुए कहा,कि ये शहर शिक्षा, अध्यात्म और साहित्य का एक बड़ा मरकज़ रहा है,

उन्होंने शायर वामिक जौनपुरी और वज़ीर हसन साहब की ख़िदमात को सराहा,और कहा कि भारत और ईरान के रिश्ते सदियों पुराने हैं,जो मोहब्बत, तहज़ीब और रूहानी रिश्तों से जुड़े हुए हैं। मजलिस में महिलाओं बुजुर्गों युवाओं  बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी साथ-साथ अन्य वर्गों की उपस्थिति ने मजलिस को वास्तविक सामाजिक संगम बना दिया। आयतुल्ला डॉक्टर हकीम  इलाही ने कहा कि जौनपुर की सर जमीन पर आकर उन्हें एक अलग ही अपनापन महसूस हुआ उन्होंने कहा कि यहां की तहजीब  परंपरा और गंगा जमुनी तहज़ीब पूरी दुनिया के लिए एक विशाल है।
मजलिस के दौरान शहीद लीडर के भारत के बारे में नेक जज़्बात को भी लोगों के सामने रखा गया,और करबला के उस पैग़ाम को दोहराया गया,जो हर दौर में हक़ और इंसाफ़ की पहचान बना हुआ है।

इसी पैग़ाम को ज़िंदा रखते हुए
जौनपुर में शिया और सुन्नी दोनों मसलकों की अलग-अलग अंजुमनों की तरफ से सबील का भी खास इंतज़ाम किया गया।जहाँ मजलिस में आने वाले लोगों को पानी और शरबत पेश किया गया।

ये मंज़र सिर्फ एक मजलिस का नहीं था,बल्कि मोहब्बत,भाईचारे और इंसानियत की उस खूबसूरत तस्वीर का था,जहाँ ग़म भी लोगों को एक-दूसरे के करीब ले आता है।

आंखें नम थीं,लबों पर दुआएं थीं
और दिलों में करबला का पैग़ाम पहले से कहीं ज्यादा ज़िंदा था

जौनपुर की इस मजलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शहादत सिर्फ एक वाक़या नहीं बल्कि हक़ सब्र और इंसानियत का वो आवाज़ है 
जो कभी ख़ामोश नहीं होता है।

मजलिस के दौरान मौलाना तकी नकदी, मौलाना कमर हसनैन,राजधानी लखनऊ के टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना कारी शाह फजलुल मन्नान रहमानी,मौलाना कारी जिया जौनपुरी ने भी तकरीर किया।मजलिस का संचालन विख्यात शायर अनीस जायसी ने किया। मुख्य रूप से इस मौके पर इमामे जुमा मौलाना महफूजुल हसन ख़ान, मौलाना सफदर हुसैन जैदी के अलावा काफी संख्या में आलिमों की उपस्थिति रही।