जौनपुर।दो दिन पहले शहर में चाइनीज मांझा बेचने वाले दुकानदारो ने संकल्प लिया था कि अब कभी भी प्रतिबंध चायनीज मांझा नहीं बेचेंगे और कोई भी मांझा बेचेगा तो प्रशासन को खबर दी जाएगी।अब कहां और किस तरह और कहां से चायनीज मांझा शहर में आ रहा है और धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।जिसका नतीजा सामने है कबूतर के चायनीज मांझा में फंसकर जख्मी हो जाना इस बात को दर्शाता है कि अभी भी चायनीज मांझा बेचने वालों की नियत साफ़ नहीं है। सिर्फ प्रशासन की नजर में न आने के लिए दिखावे के तौर पर संकल्प लेने की झूठी कहानी बना दिया गया है। जिसकी शहर में हर तरफ काफी चर्चा हो रही है।
उदहारण के तौर पर देखा जाए तो रविवार को थाना लाइन बाजार क्षेत्र के शीतला चौकियां बड़ागर चौराहा पर एक पेड़ की डाल पर बे जुबान कबूतर चाईनीज मांझा में फंसकर जख्मी हालत में तड़प रहा था। जिंदगी और मौत से जूझ रहे कबूतर को देख पर्यावरण पक्षी प्रेमी बिजली विभाग से सेवानिवृत अमरनाथ वर्मा ने जब लोगों को यह बात बताई तो। मौजूद गुड्डू सेठ, अमरनाथ वर्मा, अरमान, तिलकधारी यादव आदि ने मिलकर कबूतर को किसी तरह चायनीज मांझा से अलग कर सुरक्षित उसे खुले आसमान में छोड़ दिया। बता दें पशु-पक्षी हमारे जीवन में दया के पात्र हैं। इनके प्रति संवेदनशील धरती का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका है। जैसे मूल के बिना पेड़ संभव नहीं है, वैसे ही जीव दया के बिना मनुष्य का जीवन निरर्थक है। वहीं बेजुबान जीव, जंतु, पक्षी मनुष्य की तरह बोल नहीं सकते लेकिन उनके मन में प्रेम संवेदना दर्द तथा सुख-दुख की भावना होती है।