घर वालों ने डॉक्टर पर लगाया धन उगाही का आरोप
जौनपुर। भंडारी रेलवे स्टेशन के पास एक प्राइवेट अस्पताल में कई दिनों से भर्ती मरीज की हालत अचानक बिगड़ने पर परिजनों ने जमकर किया हंगामा। और डॉक्टर पर मरीज को भर्ती कर अवैध रूप से धन उगाही के साथ शोषण का लगाया आरोप।
सूत्रों की माने तो मामला शुक्रवार दिन के लगभग 2:30 बजे का है।खेतासराय थाना क्षेत्र के अमरेथूवा गांव निवासी अदालती प्रसाद की पत्नी प्यारी देवी की तबीयत खराब होने के कारण इस निजी अस्पताल में लगभग 6 दिन पूर्व भर्ती कराया गया। लेकिन हालत में सुधार होने के बजाय हालत दिन पर दिन बिगड़ती चली गई। ऐसा होने के बावजूद हटधर्मी पर अड़ा डॉक्टर विभिन्न प्रकार की दवाइयां बदलते हुए मरीज के परिजन को पूरी तरह इलाज के नाम पर डॉक्टर द्वारा अच्छी खासी रकम परिजनों से यह भरोसा दिला कर वसूला जा रहा था। कि जल्द ही मरीज की तबीयत में सुधार हो जाएगा।
हालांकि शुक्रवार के दिन जब मरीज की ज्यादा हालत खराब हो गई तो उसे दूसरी जगह दिखाने के लिए।कह कर डॉक्टर ने अस्पताल कर्मचारियों से एंबुलेंस में लिटाकर रखवा दिया गया। मरीज के परिजन का यह भी आरोप है कि डॉक्टर द्वारा इलाज के नाम पर 6 दिन में अच्छी खासी रकम ले ली गई। और जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जिसके कारण परिवार के लोग चिकित्सक पर भड़क गए। वैसे भी यह चर्चा आम है कि नगर का यह सबसे महंगा डॉक्टर है यह तो भलिभात सबको मालूम है।लेकिन अनुभव भी इसके पास कम है यह भी आज साबित हो गया। दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि इस निजी अस्पताल में ना तो ट्रेंड फार्मासिस्ट है और ना ही ट्रेंड स्टाफ नर्स हीं। बस चिकित्सा से संबंधित उच्च अधिकारियों की कृपा से इलाज के नाम पर गरीब मरीजों का खून चूस कर यह अस्पताल। अस्पताल नाम के शब्द का दुरुपयोग करने के साथ बगैर किसी भय के धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।और मरीजों का डॉक्टर द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। वैसे भी इस अस्पताल के चिकित्सक का एक फार्मूला बहुत ही प्रसिद्ध है पहले दाम बाद में काम के तर्ज पर काम करने का हैं। ऐसे शहर में बहुत से हॉस्पिटल हैं जिनके पास ना तो ट्रेंड फार्मासिस्ट ना ही ट्रेंड नर्स ही है बस अस्पताल चल रहा है और मरीज का शोषण खुलेआम हो रहा है। और ऐसे अस्पतालों में अगर डॉक्टर की लापरवाही की वजह से मरीजों की मौत हो जाती है तो। मरीज के परिजन द्वारा हंगामा करने के साथ ही चिकित्सा से संबंधित उच्च अधिकारियों से डॉक्टर की शिकायत की जाती है तो फौरी तौर पर अस्पताल, डॉक्टर एवं अस्पताल कर्मचारियों की जांच पड़ताल करने के बाद गड़बड़ रिपोर्ट को भी न जाने क्यों आंखों पर पट्टी बांधकर रद्दी टोकरी में मामले को डाल दिया जाता है। जिसकी शहर में चर्चाएं हमेशा होती रहती है।