जौनपुर। किन्नर बनने की चाह में एक नर्तक ने खुद को अर्ध मूर्छित कर ब्लेड से अपना गुप्तांग काट लिया जिसके चलते वह गंभीर रूप से घायल हो गया । परिजन आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए उसे लेकर जिला मुख्यालय के कई अस्पतालों का चक्कर काटते रहे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। कोई मुहमांगी रकम न मिलने तो कुछ हालत गंभीर देखकर उसका उपचार करने के लिए ही तैयार नहीं हुए।
हालांकि सप्ताह भर का समय गुजर जाने पर जब जख्म से भयंकर दुर्गन्ध उठने लगी और शरीर में जहर फैलने का खतरा बढ़ गया तो परिजन की गुहार पर जनपद के प्रख्यात एक सर्जन ने दैनिय हालत देखकर फ्री में ऑपरेशन कर कटे गुप्तांग को जोडक़र उसकी जान की हिफाजत करने में सहयोग किया। जिसके के कारण परिजन समेत नात-रिश्तेदारों में भी खुशी का माहौल उत्पन्न हो गया।हालंकि पीड़ित अभी भी अस्पताल में भर्ती है परन्तु उसकी हालत खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
सूत्रों द्वारा घटना कुछ इस प्रकार बताई जा रही है कि सिकरारा थाना क्षेत्र के फत्तूपुर अजोसी निवासी अखिलेश कुमार गौतम उम्र लगभग 36 वर्ष पिछले कई वर्षों से मोबाइल में वीडियो से प्रभावित होकर किन्नरों के साथ रहकर नाचने-गाने का कार्य कर रहा है। अपनी रूचि के चलते वह समाज की गुरू से दीक्षा लेकर उन्हीं के भेष में रह भी रहा है। अखिलेश के मुताबिक इस पेशा से जुडऩे के बाद ट्रेनों में सफर के दौरान पुलिस परेशान करती है। अकेले में ले जाकर चेक करने के बाद बेरहमी से मारती है। इन सब से बचाव व पूरी तरह किन्नर बनने के लिए पिछले सप्ताह वह मेडिकल से दवा लेकर खुद अपने आप को बेहोशी दिया और ब्लेड से अपने प्राईवेट पार्ट को काट लिया। घटना के समय परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। शाम को भाई जब मजदूरी कर घर लौटा तो उसकी दशा देख दंग रह गया।
पूछे जाने पर बताया कि अब किन्नर बनकर ही रहेंगे। समझाने पर किसी तरह अस्पताल जाने के लिए राजी हो गया। खून से लथपथ हालत में मडिय़ाहूं के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया। यहां के चिकित्सकों ने भी बिगड़ी दशा देख अन्यत्र ले जाने की बात कहकर अपना पीछा छुड़ा लिया। इसके बाद घर चला गया। बड़े अस्पताल जाने के लिए उसके पास पैसा ही नहीं था।
सप्ताहभर बाद जख्म में सड़न होने से दुर्गन्ध आने के साथ हालत गंभीर हो गयी। तत्पश्चात सिटी स्टेशन रोड स्थित एक हॉस्पिटल ले जाया गया वहां 25 हजार की मांग की गयी। देने में असमर्थता जताने पर लौटा दिया गया। इसके बाद कई और हॉस्पिटल जाकर गरीबी का हवाला देते हुए गुहार लगाया लेकिन किसी को भी तरस नहीं आयी। अंत में वाजिदपुर मोहल्ला के पास रहने वाले एक सर्जन के पास ले जाया गया। उन्होंने मरीज की चिंताजनक हुई हालत और परिजन की बेबशी देख उसे भर्ती कर फ्री में ऑपरेशन कर कटे प्राइवेट पार्ट को जोडक़र उसकी जान बचाने में सहायता किया। यह भी बताया गया कि एक-दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।